Thursday, August 11, 2011

सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय अनुसूचित जातियों का शैक्षिक सशक्तीकरण

भारतीय संविधान की धारा 46 में कहा गया है कि राज्य जनता के कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की विशेष देखभाल को बढ़ावा देगा।

आजादी के बाद अनुसूचित जातियों के शैक्षिक सशक्तीकरण के लिए बहुत से उपाय किये गये। सभी स्तरों पर शिक्षा में उनकी पहुंच और भागीदारी में सुधार लाने के उद्देश्य से सरकार ने अनुसूचित जातियों की अधिक संख्या वाले क्षेत्रों में शैक्षिक संस्थाओं के प्रावधान जैसे- कार्यक्रम शुरू किये जिसमें मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिक पश्चात छात्रवृत्ति, दोपहर भोजन योजना, वर्दी, पुस्तक, लेखन सामग्री, छात्रावास, कोचिंग, एम फिल और पीएचडी के छात्रों के लिए अध्येतावृत्ति तथा विदेश से मिलने वाली छात्रवृत्ति आदि शामिल हैं।

2. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अनुसूचित जातियों के शैक्षिक विकास के लिए निम्मलिखित योजनाएं कार्यान्वित कर रहा है।

· अनुसूचित जातियों के लिए मैट्रिक- पश्चात छात्रवृत्ति

· अस्वच्छ काम में लगे बच्चों के लिए मैट्रिक- पूर्व छात्रवृत्ति

· शीर्ष दर्जे की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति

· राजीव गांधी राष्ट्रीय अध्येतावृत्ति

· बाबू जगजीवन राव छात्रावास योजना

· अनुसूचित जातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग छात्रों के लिए निशुल्क कोचिंग

राष्ट्रीय विदेश छात्रवृत्ति 1. अनुसूचित जातियों के लिए मैट्रिक- पश्चात छात्रवृत्ति

यह योजना अनुसूचित जातियों के छात्रों के शैक्षिक सशक्तीकरण के लिए भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही एक मात्र सबसे बड़ी योजना है जो मंत्रालय की फ्लैगशिप योजना है। यह देश में सबसे पुरानी छात्रवृत्ति योजना है जिसे वर्ष 1944 से संचालित किया जा रहा है और फिलहाल यह अनुसूचित जाति के लगभग 46 लाख छात्रों को लाभांवित कर रही है। यह एक संसाधन आधारित योजना है और इसका लक्ष्य अनुसूचित जाति के छात्रों को मैट्रिक पश्चात पाठ्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है जो पत्राचार, दूरस्थ और सतत शिक्षा पाठ्यक्रमों सहित मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से संचालित किये जा रहे हैं।

इस योजना को पहली अप्रैल 2003 में संशोधित किया गया था इसलिए इसका संशोधन जरूरी हो गया था। मंत्रालय के दिनांक, 31 दिसंबर 2010 के आदेश के द्वारा इस योजना को पहली जुलाई 2010 (संदेह दूर करें, 2011) से संशोधित किया गया। पहली जुलाई 2010 से लागू किये गये संशोधन में (1) आय की अधिकतम सीमा को मौजूदा एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये प्रतिवर्ष किया गया, (2) रखरखाव और अन्य भत्ते, और तीन पाठ्यक्रमों के समूह को सुसंगत बनाना शामिल हैं।

इस योजना के संशोधन के माध्यम से योजना के अधीन बजट आवंटन में तीन गुणा वृद्धि की गयी है। वर्ष 2008-09 के दौरान 750.00 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन की तुलना में वर्ष 2011-12 में 2218.00 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रावधान किया गया है।

2. अस्वच्छ काम में लगे बच्चों के लिए मैट्रिक- पूर्व छात्रवृत्ति

इस योजना का उद्देश्य सिर पर मैला ढोने, जानवरों की खाल उतारने जैसे- अस्वच्छ काम में लगे बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना को पहली अप्रैल 2008 से संशोधित किया गया है। मासिक छात्रवृत्ति और वार्षिक तदर्थ अनुदान की दरों में उल्लेखनीय वृद्धि की गयी है। इस योजना के अधीन सहायता में दो घटक शामिल हैं: 1. मासिक छात्रवृत्ति (10माह के लिए) 2. वार्षिक तदर्थ अनुदान(लेखन सामग्री, वर्दी आदि जैसे आकस्मिक व्ययों को पूरा करने के लिए)

2.2 पहली अप्रैल 2008 से प्रभावी दोनों घटकों की मौजूदा दरें निम्नानुसार हैं:

1. छात्रावास में रहने वालों के लिए

कक्षा तीन से लेकर कक्षा दस तक के छात्रों को छात्रावास में रहने वालों की श्रेणी में रखा जायेगा। छात्रवृत्तियों की दरें कक्षा तीन से कक्षा दस तक 700रुपये प्रतिमाह है, जो दस माह के लिए है।2. डे स्कालर

पहली कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक के छात्रों को डे-स्कालर के रूप में शामिल किया गया है। इसके लिए छात्रवृत्तियों की दरें 110रुपये प्रतिमाह रखी गयी हैं जो दस माह के लिए है।

3. तदर्थ अनुदान

डे स्कालर और छात्रावास में रहने वाले छात्र क्रमशः 750रुपये और 1000रुपये प्रति छात्र प्रति वर्ष तदर्थ अनुदान के लिए पात्र हैं। यह छात्रवृत्ति दसवीं कक्षा के अंत में समाप्त हो जाएगी। इस योजना के अधीन कोई आय सीमा निर्धारित नहीं है।

इस योजना से लक्षित समूह के लगभग सात लाख छात्र लाभांवित हो रहे हैं। वर्ष 2011-12 के लिए इस योजना के अधीन 80 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं।

छात्रवृत्तियों के प्रभावकारी वितरण के लिए उपाय

उपरोक्त दोनों योजनाओं का क्रियान्वयन संबंधित राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है। छात्रवृत्तियों के प्रभावकारी वितरण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उनके लिए कई निर्देश जारी किये गये हैं।

1. छात्रों को मासिक आधार पर समयानुसार और नियमित तौर पर छात्रवृत्ति की राशि का भुगतान हो।

2. छात्रों के बैंक /डाकघर खाते में छात्रवृत्ति की राशि को सीधे तौर पर भुगतान करना।

3. छात्रवृत्ति की राशि का इलेक्ट्रोनिक विधि से भुगतान करना।

राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गयी है कि वे सभी निजी संस्थाओं के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें ताकि वे अनुसूचित जाति के पात्र छात्रों से इसी प्रकार का शिक्षण शुल्क वसूल न करें।

3.शीर्ष दर्जे की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति

वर्ष 2007-08 से लेकर अनुसूचित जातियों के लिए एक शीर्ष दर्जे की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति योजना क्रियान्वित की जा रही है। इसके अधीन चुनिंदा अग्रणी संस्थाओं ( जैसे आईआईटी,आईआईएम,एनआईटी आदि) में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के छात्रों को उदारता पूर्वक छात्रवृत्तियां दी जाती हैं।

इस योजना के अधीन प्रत्‍येक वर्ष अधिकतम 1250 नयी छात्रवृत्‍तियां दी जा सकती हैं। योजना के अधीन फिलहाल अग्रणी संस्‍थाओं की संख्‍या 181 है, जिसमें अन्‍य संस्‍थाओं के अलावा 15 आइआईटी, 20 एनआईटी, 10 आईआईएम और 7 राष्‍ट्रीय कानून विद्यालय शामिल हैं।

अनुसूचित जाति के वो छात्र इस छात्रवृत्‍ति के लिए पात्र हैं, जिनके परिवार की सभी स्रोतों से कुल आय अधिकतम 2.00 लाख रुपए प्रति वर्ष है। वर्ष 2011-12 के दौरान इस योजना के लिए 25.00 करोड़ रुपए का आबंटन निर्धारित है।

4. राजीव गांधी राष्‍ट्रीय अध्‍येतावृत्‍ति वर्ष 2005-06 में शुरू की गई इस योजना के अधीन विश्‍वविद्यालयों, शोध और वैज्ञानिक संस्‍थाओं में एम. फिल, पीएचडी और समतुल्‍य पाठ्यक्रमों से जुड़े अनुसूचित जाति के छात्रों को प्रत्‍येक वर्ष 2000 शोध अध्‍येतावृत्‍तियां प्रदान की जाती हैं। योजना के कार्यान्‍वयन में विश्‍वविद्यालय अनुदान आयेाग शीर्ष एजेंसी है। वर्ष 2010-11 से लेकर प्रतिवर्ष अध्‍येतावृत्‍तियों की संख्‍या को 1333 से बढ़ाकर 2000 कर दी गई है। योजना के लिए वर्ष 2011-12 में 125 करोड़ रुपए का आबंटन निर्धारित है।

5. बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना इस योजना का उद्देश्‍य मध्‍यम और उच्‍चतर माध्‍यमिक स्‍कूलों, महाविद्यालयों और विश्‍वविद्यालयों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के छात्रों और छात्राओं को छात्रावास की सुविधा उपलब्‍ध कराना है, ताकि उनके द्वारा बीच में पढ़ाई छोड़ने की दरों में कमी लाई जा सके। इससे न केवल साक्षरता दर को बढ़ाने में मदद मिली है, बल्‍कि उनके अध्‍ययन को पूरा करने में भी स्‍पष्‍ट रूप से एक सकारात्‍मक वातावरण बना है। वर्ष 2011-12 में इस योजनाके लिए आबंटन राशि 145 करोड़ रुपए है।

राज्‍य सरकारें/ केन्‍द्र शासित प्रदेशेां के प्रशासनों के साथ-साथ केन्‍द्रीय और राजकीय विश्‍वविद्यालयों/संस्‍थाओं केन्‍द्रीय सहायता प्राप्‍त करने हेतु पात्र हैं, जिससे वे नये छात्रावास भवनों के निर्माण और मौजूदा छात्रावास सुविधाओं का विस्‍तार कर सकते हैं। निजी क्षेत्र के गैर सरकारी संगठन और मानित विश्‍वविद्यालय भी इसी प्रकार की सहायता के लिए पात्र हैं, जिसका इस्‍तेमाल वे केवल अपनी मौजूदा छात्रावास सुविधाओं के विस्‍तार के लिए ही कर सकते हैं।

राज्‍यों को बालिकाओं के लिए छात्रावास भवनों के निर्माण और मौजूदा बालिका छात्रावास के विस्‍तार के लिए शत-प्रतिशत केन्‍द्रीय सहायता दी जाती है। बालकों के छात्रावासों के लिए राज्‍यों को 50 प्रतिशत केन्‍द्रीय सहायता दी जाती है।

6. अनुसूचित जाति और अन्‍य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए नि:शुल्‍क कोचिंगइस योजना का उद्देश्‍य संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग और विभिन्‍न रेलवे भर्ती बोडों तथा राज्‍य लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित गुप ए और बी पदों, बैंकों, बीमा कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा संचालित अधिकारी ग्रेड की परीक्षाओं के लिए कोचिंग सुविधा उपलब्‍ध कराना है। इसके साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी आदि जैसे निजी क्षेत्र में रोजगार की तैयारी के लिए पाठ्यक्रमों/रोजगारोन्‍मुखी पाठ्यक्रमों पर आधारित गुणवत्‍तापूर्ण कोचिंग उपलब्‍ध करान भी इसका उद्देश्‍य है।

अनुसूचित जातियों और अन्‍य पिछड़ा वर्गों से संबंधित केवल वे छात्र ही उपरोक्‍त योजना के लिए पात्र हैं, जिनके परिवार की आय प्रतिवर्ष दो लाख रुपए से कम है। वर्ष 2011-12 में इस योजना के लिए 10.00 करोड़ रुपए के आबंटन का प्रावधान है।

7. राष्‍ट्रीय विदेश छात्रवृत्‍ति इस योजना के अधीन मेधावी छात्रों को विदेश में स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर के विशेष क्षेत्र के पाठ्यक्रमों, पीएचडी और डॉक्‍टरल-पश्‍चात, शोध कार्यक्रमों में उच्‍चतर अध्‍ययन करने के लिए वित्‍तीय सहायता दी जाती है। योजना के अधीन प्रत्‍येक वर्ष 30 छात्रवृत्‍तियां प्रदान की जाती हैं। पहले केवल उन्‍नत इंजीनियरिंग विषयेां तक ही इस छात्रवृत्‍ति की उपलब्‍धता सीमित थी। परन्‍तु वर्ष 2010-11 से लेकर इसमें औषधि, पूर्णत: विज्ञान (प्‍योर साइंस), इंजीनियरिंग, कृषि विज्ञान और प्रबंधन को भी शामिल किया गया है।

योजना के अधीन संस्‍थओां द्वारा वसूले गए वास्‍तविक, यात्रा वीसा शुल्‍क, बीमा किस्‍त पर वार्षिक आकस्‍मिक भत्‍ता, आकस्‍मिक यात्रा भत्‍ता आदि के लिए धनरशि दी जाती है। इस योजना के अधीन एक माता-पिता/अविभावक का केवल एक ही बच्‍चा इस योजना का लाभ उठा सकता है। संभावित लाभार्थी की उम्र 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के अधीन वर्ष 2001-12 से 6.00 करोड़ रुपए के आबंटन का प्रावधान है।

अनुसूचित जाति के छात्रों और सिर पर मैला ढोने वाले परिवारों के छात्रों के लिए रियायती शैक्षिक ऋण9. राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति वित्‍त और विकास निगम (एनएसएफडीसी) ने पहली दिसम्‍बर, 2009 से लेकर अनुसूचित जाति के पात्र छात्रों को उच्‍चतर अध्‍यययन के लिए शैक्षिक ऋण उपलब्‍ध कराने के लिए एक योजना शुरू की है। इसके अधीन छात्रों के लिए ब्‍याज दर प्रतिवर्ष 4 प्र\तिशत और छात्राओं के लिए प्रतिवर्ष 3.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष है। इसके माध्‍यम से ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम 40,000 रुपए और शहरी क्षेत्रों में अधिकतम 55,000 रुपए की वार्षिक आय वाले परिवारों के अनुसूचित जाति के छात्रों को इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव-प्रौद्योगिकी, भवन निर्माण, शिक्षा, कानून, नर्सिंग, पत्रकारता, पीएचडी, सीए/आईसीडब्‍ल्‍यूए आदि जैसे पूर्णकालिक व्‍यावसायिक/तकनीकी पाठ्यक्रमों को पूरा करने के लिए ऋण उपलब्‍ध कराया जाता है।

10. राष्‍ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्‍त और विकास निगम (एनएसएफडीसी) सिर पर मैला ढोने वालों और उन पर निर्भर करने वालों सहित सफाई कर्मचारियों को स्‍नातक स्‍तर और स्‍नातक तथा स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर पर व्‍यावसायिक/तकनीकी पाठ्यक्रमों को पूरा करने के लिए 4 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज दर (बालिकाओं के लिए 3.5 प्रतिशत) पर रियायती ऋण उपलब्‍ध कराता है।

भारत और विदेश में उच्‍चतर शिक्षा प्राइज़ करने के लिए ऋण की अधिकतम राशि क्रमश: 10 लाख रुपए और 20 लाख रुपए है।

11. सरकार द्वारा किए गए विभिन्‍न उपायों के परिणामस्‍वरूप अनुसूचित जातियों की शैक्षिक स्‍थित में काफी सुधार हुआ है, फिर भी अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

11.1 अनुसूचित जाति और कुल जनसंख्‍या के बीच साक्षरता दर का अंतर वर्ष 1961 में 14 प्रतिशत अंक था, जो वर्ष 2001 में घटकर 10.1 प्रतिशत अंकों तक नीचे आ गया। अनुसूचित जातियों की कुल मिलाकर और महिला साक्षरता दरों में काफी वृद्धि हुई है जो वर्ष 1961 में कुल अनुसूचित जातियों के लिए 10.3 प्रतिशत और महिला अनुसूचित जातियों के लिए 3.3 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2001 में कुल अनुसूचित जातियों के लिए 54.7 प्रतिशत और महिला अनुसूचित जातियों के लिए 41.9 प्रतिशत हो गई। इतना ही नहीं, अनुसूचित जाति की महिलाओं और कुल महिलाओं की साक्षरता दरों के बीच अंतर वर्ष 1991 के 15.5 प्रतिशत अंकों से घटकर वर्ष 2001 में 11.8 प्रतिशत अंकों तक नीचे आ गया। हालांकि इनके बीच अंतर अभी भी है, जिसे जितना संभव हो जल्‍द से जल्‍द हटाना जरूरी है।

11.2 प्राथमिक और उच्‍च प्राथमिक दोनों स्‍तरों पर अनुसूचित जाति के बच्‍चों के लिए सकल प्रवेश अनुपात (जीईआर) में काफी सुधार हुआ है। वास्‍तव में, उच्‍च प्राथमिक स्‍तर पर अनुसूचित जातियों के लिए जीईआर को वर्ष 2008-09 में कुल जनसंख्‍या के लिए जीईआर से भी अधिक पाया गया है।

11.3 पिछली अवधि के दौरान अनुसूचित जातियों के छात्रों में बीच में पढ़ाई छोड़ने की दरों में भी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यह अभी भी कुल जनसंख्‍या की तुलना में अधिक है।

सरकार सभी स्‍तरों पर शैक्षिक संस्‍थाओं में अनुसूचित जाति के छात्रों की भागीदारी को अधिक से अधिक बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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