Thursday, August 11, 2011

देश में भू अभि‍लेखों का आधुनि‍कीकरण

भूमि‍ एक परि‍सम्‍पत्‍ति‍ के रूप में ग्रामीण और शहरी इलाकों में महत्‍वपूर्ण भूमि‍का नि‍भाती है। इसलि‍ए, यह जरूरी है कि‍ भू‑स्‍वामी के पास ऐसे भू अभि‍लेख हों जो असली हों और जि‍नमें कि‍सी तरह की हेरफेर न की जा सके। भारत में अति‍ प्राचीन काल से ही शासक लगान वसूली, सैन्‍य उद्देश्‍यों, राजनैति‍क सीमाओं को तय करने, वि‍वादों को सुलझाने आदि‍ के लि‍ए जमीन की पैमाइश करते रहे हैं।

आबादी बढ़ने के साथ जमीन के टुकड़े छोटे और महंगे होते गए तथा पंचायत, चकबंदी वि‍भाग, सर्वेक्षण वि‍भाग, राजस्‍व एवं पंजीकरण वि‍भाग आदि‍ वि‍भि‍न्‍न एजेंसि‍यां वजूद में आईं। इसे बदलते परि‍दृश्‍य में भू अभि‍लेखों को तहरीर में तैयार करना और उन्‍हें संभालकर रखना बहुत कठि‍न है। यह मांग बढ़ती जा रही है कि‍ अद्यतन और सटीक भू अभि‍लेखों तक लोगों की पहुंच बने। देश में 80 के दशक में कंप्‍यूटर आने से यह समस्‍या हल हो गई। वर्ष 1985 में राज्‍य राजस्‍व मंत्रि‍यों की बैठक हुई और उसमें लि‍ए गए नि‍र्णयों के अनुरूप दो केंद्र द्वारा प्रायोजि‍त योजनाएं – राजस्‍व प्रशान को मजबूत करना एवं भू अभि‍लेखों को अद्यतन बनाना (एसआरए एवं यूएलआर) तथा भू अभि‍लेखों का कंप्‍यूटरीकरण (सीएलआर) शुरू की गईं।

भू अभि‍लेखों के उन्‍नयन और रखरखाव, सर्वेक्षण और बंदोबस्‍ती संगठनों को स्‍थापि‍त करना और उन्‍हें मजबूत बनाने तथा सर्वेक्षण प्रशि‍क्षण बुनि‍यादी ढांचे के नि‍र्माण, सर्वेक्षण के आधुनि‍कीकरण एवं बंदोबस्‍ती गति‍वि‍धि‍यों और राजस्‍व प्रणाली को मजबूत बनाने के संबंध में राज्‍य तथा केंद्र शासि‍त प्रदेशों की मदद करने के लि‍ए एसआरए एवं यूएलआर को 1987‑88 में शुरू कि‍या गया था। बि‍हार और उड़ीसा राज्‍यों के लि‍ए योजना को 1987‑88 में मंत्रि‍मंडल ने मंजूरी दी थी। आगे चलकर पूरे देश को इसके दायरे में ले आया गया। वि‍त्‍तपोषण केंद्र और राज्‍यों के बीच 50:50 के अनुपात में है और केंद्र शासि‍त प्रदेशों के लि‍ए शत प्रति‍शत है। योजना के अंतर्गत होने वाली प्रगति‍ का ब्‍योरा इस प्रकार है:‑

· 1466 भू अभि‍लेख कक्षों का नि‍र्माण 16 राज्‍यों/केंद्र शासि‍त प्रदेशों में पूरा

· पटवारि‍यों/तलाठि‍यों/आरआई के लि‍ए 4311 कार्यालय‑सह‑आवास के नि‍र्माण का कार्य 15 राज्‍यों/केंद्र शासि‍त प्रदेशों में पूरा

· 20 राज्‍यों में 64 राजस्‍व/सर्वेक्षण प्रशि‍क्षण संस्‍थानों को नि‍र्माण, मरम्‍मत, उन्‍नयन, आधुनि‍क उपकरणों की उपलब्‍धता के जरि‍ए मजबूत बनाना

· अरुणाचल प्रदेश, असम, बि‍हार, छत्‍तीसगढ़, दादरा एवं नागर हवेली, गोवा, गुजरात, हि‍माचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्‍यप्रदेश, महाराष्‍ट्र, मीजोरम, उड़ीसा, तमि‍लनाडु, राजस्‍थान, उत्‍तरप्रदेश और पश्‍चि‍म बंगाल में सर्वेक्षण/पुनर्सर्वेक्षण का काम शुरू

भूमि के कम्‍प्‍यूट्रीकृत अभिलेख की केंद्र प्रायोजित योजना 1988-89 में 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता से पायलट परियोजना के तौर पर राज्‍यों के आठ जिलों में शुरू हुई। यह आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी, असम के सोनीतपुर, बिहार के सिंगभूमि, गुजरात में गांधीनगर, मध्‍यप्रदेश में मुरैना, महाराष्‍ट्र में वर्धा, ओड़ीशा में मयूरभंज और राजस्‍थान में डुंगरपुर में आरंभ की गई। बाद में इसे देश के अन्‍य भागों में आरंभ किया गया। इस योजना के मुख्‍य उद्देश्‍य थे –

1. भूखंड़ों के मालिकाना हक का कंप्‍यूट्रीकृत अभिलेख जिससे कि भू-स्‍वामियों को दस्‍तावेज की प्रति सही समय से और उचित रूप में उपलब्‍ध कराई जा सके।

2. डिजीटल प्रौद्योगिकी की नवीनतम तकनीक के जरिये भू-आलेख को लम्‍बे समय तक भंडारित किया जा सके।

3. सूचनाओं को आंकड़े और तथ्‍यात्‍मक रूप से जल्‍दी और प्रभावी तरीके से वापस प्राप्‍त किया जा सके।

4. कृषि संबंधी गणना के लिए डाटाबेस मुहैया कराया जा सके।

इस योजना से निम्‍नलिखित प्रगति हासिल की गई –

1. जिन राज्‍यों ने हस्‍तलिखित भू-अधिकार के दस्‍तावेज देने बंद किये उनकी संख्‍या 16 हो गई।

2. भू-अधिकार संबंधी दस्‍तावेज की कम्‍प्‍यूट्रीकृत प्रति को वैधानिक मान्‍यता देने वाले राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्‍या 21 हो गई।

3. वेबसाइड पर भूमि अधिकार संबंधी आंकडे उपलब्‍ध कराने वाले राज्‍यों केंद्र शासित प्रदेशों की संख्‍या 16 हो गई।

4. मालिकाना हक संबंधी तबदीली के लिए कम्‍प्‍यूटर का इस्‍तेमाल करने वाले राज्‍यों - केंद्र शासित प्रदेशों की संख्‍या 18 हो गई।

5. जिन राज्‍यों - केंद्र शासित प्रदेशों ने भूमिकर संबंधी मा‍नचित्र को डिजीटल प्रणाली में परिवर्तित कराया, उनकी संख्‍या 26 हो गई।

6. चार हजार चार सौ 34 तहसील/ताल्‍लुक, 1045 उपमंडल, 392 जिलों में कम्‍प्‍यूटर केंद्र स्‍थापित किये गए, जबकि 17 राज्‍यों के मुख्‍यालायों में निगरानी प्रकोष्‍ठ गठित किये गये।

इन दोनों योजनाओं को एक साथ मिला दिया गया और इनके स्‍थान पर वर्ष 2008-09 में एक संशोधित केंद्र प्रायोजित योजना - राष्‍ट्रीय भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम आरंभ किया गया। इस योजना का परम लक्ष्‍य आज के दौर में प्रचलित अनुमानिक अधिकार के स्‍थान पर निश्चित अधिकार व्‍यवस्‍था की प्रणाली आरंभ करना। इसके लिए विभाग ने प्रारूप भूमि अधिकार विधेयक तैयार किया है, जिसे राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सलाह तथा टिप्‍पणी के लिए भेजा गया।

राष्‍ट्रीय भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के लिए जिले को इकाई माना गया और इससे संबंधित सभी तरह की गतिविधियां जिले में केंद्रित मानी गई। इस कार्यक्रम के तहत अब तक 26 राज्‍यों में दो सौ चार जिलों में लागू किये जाने के लिए धन निर्गत किये गये है। इसके अतिरिक्‍त 18 राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों में राष्‍ट्रीय भू-अभिलेख आधुनिकीकरण के संबंध में व्‍यापक प्रशिक्षण देने के लिए 21 प्रकोष्‍ठ/केंद्र स्‍थापित किये गये हैं। नागरिकों को इन राष्‍ट्रीय भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम केंद्रों से एक या कई रूपों में लाभ पहुंचने की उम्‍मीद है।

1. नागरिकों को वास्‍तविक काल के भू-स्‍वामित्‍व का दस्‍तावेज प्राप्‍त होगा।

2. ये दस्‍तावेज समुचित सुरक्षा के साथ वेबसाइड पर उपलब्‍ध होंगे और सूचना की गोपनीयता से समझौता किए बगैर भू-मालिक इनकी निशुल्‍क जानकारी प्राप्‍त कर सकेंगे।

3. दस्‍तावेजों की निशुल्‍क उपलब्‍धता से नागरिक और कर्मचारियों के बीच व्‍यवहार संबंधित दिक्‍कतों में कमी आएगी।

4. सार्वजनिक-निजी साझेदारी सेवा व्‍यवस्‍था से सरकारी तंत्र के साथ नागरिकों के अंतराफलक और कम हो सकेंगे।

5. मुद्रांक शुल्‍क पत्र और मुद्रांक शुल्‍क समाप्‍त होने से तथा बैंकों के जरिए पंजीकरण शुल्‍क को खत्‍म किए जाने से पंजीकरण तंत्र और नागरिकों का अंतराफलक और कम होगा।

6. सूचना प्रौद्योगिकी की सहायता से भू अधिकार संबंधी पत्र उपलब्‍ध कराए जाने से इसमें लगने वाले समय से अत्‍यंत कमी आई।

7. स्‍वत: तथा मालिकाना हक के स्‍वत: अदला बदली से संपत्ति संबंधी धोखाधड़ी में उल्‍लेखनीय कमी आएगी।

8. निश्चित भू: स्‍वामित से मुकदमेबाजी में भी कमी आएगी।

9. इन दस्‍तावेजों में हेरा-फेरी नहीं की सकती है।

9.

10. इस व्‍यवस्‍था से ऋण सुविधाओं को इलेक्‍ट्रोनिक लिंक से जोड़ा जा सकता है।

11. भूमि पर आधारित प्रमाण पत्र जैसे अधिवास, जाति, आय इत्‍यादि कम्‍प्‍यूटर के माध्‍यम से लोगों को उपलब्‍ध कराया जा सकेंगे।

12. इन दस्‍तावेजों पर आधारित सरकारी कार्यक्रमों के बारे में योग्‍यता की सूचना दी जा सकेगी।

13. आवश्‍यक संबंधित जानकारी संयुक्‍त भूमि संबंधी खाते की किताब उपलब्‍ध कराई जा सके।

गुजरात हरियाणा और पश्चिम बंगाल इत्‍यादि कुछ राज्‍यों ने भूमि दस्‍तावेज के आधुनिकीकरण में उल्‍लेखनीय कार्य किए हैं। हरियाणा ने अपने भू-अभिलेख व्‍यवस्‍था और पंजीकरण को एकीकृत कर दिया है। जिससे यह अद्ययत्‍न और वास्‍तविक काल दर्शाता है। पश्चिम बंगाल ने मालिकाना हक के मौलिक और स्‍थानिक दस्‍तावेजों को एकीकृत कर दिया है। गुजरात ने भूमि कर संबंधी अपने सभी मानचित्रों को डिजिटल प्रणाली में बदल दिया है। उसने संबंधित जानकारी जैसे बंजर भूमि, कृषि भूमि, नदी स्रोतों, बिजली की लाइनों सड़क मार्ग इत्‍यादि को से उल्‍लेखित किया है। इससे भिन्‍न उद्देश्‍यों के लिए समग्र व्‍यापक योजना बनाने में मदद मिल रही है।

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