2011 की जनगणना के आधार पर भारत की आबादी एक अरब, 21 करोड़ है जो दुनिया में चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। भारत के पास विश्व की कुल भूमि का 2.4 प्रतिशत हिस्सा है जबकि उसकी आबादी विश्व की कुल आबादी का 17.5 प्रतिशत है।
जनसंख्या स्थिरता सदैव सरकार का प्राथमिक एजेंडा रहा है जिसे पूरा करने के लिए परिवार नियोजन सरकार के उपायों में से एक है। वर्ष 1952 में भारत विश्व का पहला देश था जिसने जनसंख्या स्थिरता के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरु किया था। इस कार्यक्रम के तहत परिवार नियोजन पर जोर देकर जन्म दर को कम करना था ताकि ‘आबादी को एक ऐसे स्तर पर स्थिर किया जा सके जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के तकाजों के अनुरूप हो।’ कार्यक्रम बहुत समय से जारी है और इस समय परिवार नियोजन कार्यक्रम पर दोबारा ध्यान दिया जा रहा है ताकि जनसंख्या स्थिरता के साथ‑साथ मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके।
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000
राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 के अंतर्गत एक ऐसा नीतिगत ढांचा बनाना है जो लक्ष्य प्राप्ति और रणनीति कार्यान्वयन में सहायक हो ताकि प्रजनन संबंधी और बाल स्वास्थ्य की आवश्यकताएं पूरी की जा सकें तथा प्रजनन स्तरों के बदलाव (टीएफआर 2.1) को 2010 तक प्राप्त किया जा सके। राष्ट्रीय सामाजिक‑जनसांख्यकीय लक्ष्य तय किए गए हैं ताकि राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 के उद्देश्यों को पूरा किया जा सके। नीति के उद्देश्य हैं:‑
· प्रजनन संबंधी व बाल स्वास्थ्य सेवाओं, आपूर्ति और संरचनात्मक ढांचे की अपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करना। कुल प्रजनन दर (टीएफआर) के बदलाव स्तर को प्राप्त करने के लिए छोटे परिवारों की अवधारणा को प्रोत्साहित करना।
· अस्सी प्रतिशत डिलिवरी अस्पतालों में और शत प्रति शत डिलिवरी प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा करवाने के लक्ष्य की प्राप्ति।
· प्रति 1000 जीवित बच्चों की जन्म दर पर आधारित शिशु मृत्यु दर को 30 से कम करना, प्रति 100,000 जीवित बच्चों को जन्म देने वाली माताओं की संख्या पर आधारित मातृ मृत्यु दर को 100 से कम पर लाना, सभी जन्म, मृत्यु और गर्भधारण का शत प्रति शत पंजीकरण करना तथा टीके द्वारा रोकी जा सकने वाली सभी बीमारियों से बचाव के लिए बच्चों को टीके लगाना।
· लड़कियों का विवाह देर से हो यानी 18 से पहले न हो और 20 के बाद हो, ऐसा प्रयास करना।
· प्रजनन नियंत्रण और विभिन्न प्रकार के गर्भनिरोधकों की उपलब्धता के विषय में सूचना/परामर्श सबकी पहुंच में हो, यह लक्ष्य प्राप्त करना।
· संबंधित सामाजिक क्षेत्र कार्यक्रमों के कार्यान्वयन पर जोर देना ताकि परिवार कल्याण जन कार्यक्रम बन सके।
राष्ट्रीय स्तर पर कुल प्रजनन दर अब भी 2.6 है और यह स्थिति राज्यों में अलग‑अलग है। नौ राज्य प्रजनन दर बदलाव स्तर (टीएफआर >3) से काफी ऊपर है, 12 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रजनन दर बदलाव स्तर (टीएफआर – 2.1‑3) को प्राप्त करने के नजदीक है जबकि 11 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों ने <2.1 का स्तर प्राप्त कर लिया है।
स्वास्थ्य संकेतकों, पोषण स्थिति और सामाजिक‑आर्थिक परिस्थिति के मामले में भी राज्यों में विभिन्नताएं मौजूद हैं। जिन राज्यों में अन्य संकेतक कमजोर हैं, वहां परिवार नियोजन गतिविधि भी धीमी है। अत: जिन राज्यों में प्रजनन दर ऊंची है, उन राज्यों में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए सामाजिक व आर्थिक विकास तथा जीवन स्तर में सुधार के आधार पर जनसंख्या स्थिरता के लिए समग्र प्रयास किए जाने चाहिए।
दोबारा जोर देना
इस समय सरकार जनपद वार ध्यान दे रही है। इस विषय में 264 जिलों को चुना गया है। इन जनपदों और संबंधित राज्यों को सरकार समर्थन भी दे रही है ताकि परिवार नियोजन और अन्य कार्यक्रमों का बेहतर कार्यान्वयन हो सके।
सरकार प्रतिबद्ध है कि 2012 तक वह मातृ मृत्यु दर को 100/100,000 जीवित बच्चों के जन्म दर तक, शिशु मृत्यु दर को 30/1000 जीवित बच्चों के जन्म दर तक तथा प्रजनन दर बदलाव स्तर को कुल प्रजनन दर – 2.1 तक लाएगी।
जनसंख्या स्थिरता के लिए रणनीतिक विकल्प
कुल प्रजनन दर >3.0 वाले राज्य (बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ और मेघालय) : आने वाले समय में देश की कुल आबादी में इन राज्यों का 50 प्रतिशत हिस्सा हो जाएगा। इन राज्यों में सबसे पहले जो कार्य किया जाना चाहिए, वह यह है कि अपूर्ण आवश्यकताओं को तुरंत पूरा किया जाए और इच्छित प्रजनन (दो से अधिक बच्चे पैदा करने की कामना) पर आधारित दर को कम करने के लिए सामाजिक‑आर्थिक विकास पर ध्यान दिया जाए। इसी के साथ भावी जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए विवाह कम आयु में न करने को प्रोत्साहन दिया जाए और बच्चों के पैदा होने की अवधि के बीच पर्याप्त फासला सुनिश्चित किया जाए।
जिन राज्यों (उत्तराखण्ड, गुजरात, हरियाणा, जम्मू‑कश्मीर, उड़ीसा) में कुल प्रजनन दर 2.1 से <3 के बीच है : इन राज्यों में सबसे पहले यह कार्य किया जाना चाहिए कि दम्पतियों को मदद की जाए कि वे परिवार नियोजन कार्यक्रम को मजबूत बनाएं ताकि प्रजनन लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
कुल प्रजनन दर <2.1 वाले राज्य (दिल्ली और हिमाचल प्रदेश) : इन राज्यों में सबसे पहले यह कार्य किया जाना चाहिए कि जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए विवाह कम आयु में न करने को प्रोत्साहन दिया जाए और बच्चों के पैदा होने की अवधि के बीच पर्याप्त फासला सुनिश्चित किया जाए।
ध्यान देने योग्य प्रमुख क्षेत्र – 12वीं पंचवर्षीय योजना : परिवार नियोजन
· नए गर्भनिरोधकों के माध्यम से गर्भनिरोध की अपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करना।
· परिवार नियोजन सेवा खासतौर से उन स्थानों पर जहां इस तरह के मामले सबसे ज्यादा आते हैं, वहां नसबंदी/नलबंदी को प्रोत्साहित करना।
· परिवार नियोजन सेवाओं के प्रदाता आधार को सुधारने के लिए निजी/गैर सरकारी संगठनों की सेवाओं को सूचीबद्ध करना।
· आशा स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से गर्भनिरोधकों का समुदाय आधारित वितरण।
परिवार नियोजन के लिए हर स्तर पर और खासतौर से उच्चतम राजनैतिक स्तर पर जोरदार हिमायत करना।
लक्ष्य को प्राप्त करने की रणनीति
· प्रत्येक स्तर (राष्ट्रीय, राज्य और जिला) पर मानव संसाधन (कार्यक्रम प्रबंधन के लिए) संरचना को मजबूत करना।
· जिला अस्पतालों और जहां परिवार नियोजन संबंधी मामले सबसे ज्यादा आते हैं, वहां समर्पित परामर्शक की नियुक्ति करना।
· आशा स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से कम दरों पर गर्भनिरोधकों के विपणन को घरों तक पहुंचाना।
· नसबंदी/नलबंदी सेवाओं के लिए सेवा प्रदाताओं और सेवा प्राप्तकर्ता के लिए क्षतिपूर्ति पैकेज में सुधार करना।
· गर्भाशय में गर्भनिरोधक (मल्टी लोड आईयूडी ‑ 375) लगाने को प्रोत्साहन देना। इसे कम समय के लिए शरीर में लगाना ताकि शरीर धीरे‑धीरे इसे स्वीकार कर ले।
· गर्भाशय आधारित गर्भनिरोधकों के इस्तेमाल और उसे धारण करने को प्रोत्साहन देने के लिए आशा स्वास्थ्यकर्मियों के वास्ते प्रदर्शन आधारित भुगतान योजना।
· सेवाओं के लिए और अधिक निजी सेवा प्रदाताओं/गैर सरकारी संगठनों को सूचीबद्ध करना।
· जोरदार समर्थन को सुनिश्चित करना।
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*स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से प्राप्त जानकारी