Thursday, August 11, 2011

बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना

बाबू जगजीवन राम (5 अप्रैल, 1908-6 जुलाई, 1986) जिन्‍हें प्‍यार से लोग बाबूजी बुलाया करते थे, एक स्‍वाधीनता सेनानी और सामाजिक न्‍याय के मसीहा थे। उन्‍होंने शोषितों और दलितों को समान अवसर दिलाने के लिए समर्पित एक संगठन ‘अखिल भारतीय शोषित वर्ग लीग’ स्‍थापित करने में अहम भूमिका निभाई। 1946 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अस्‍थायी सरकार में वह सबसे युवा मंत्री थे। भारत के पहले केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल में वह श्रम मंत्री और संविधान सभा के सदस्‍य बने, जहां उन्‍होंने सुनिश्चित किया कि सामाजिक न्‍याय की व्‍यवस्‍था संविधान में की जाए। एक राष्‍ट्रीय नेता, सांसद, केन्‍द्रीय मंत्री और शोषित वर्ग के मसीहा के रूप में, उन्‍होंने भारतीय राजनीति में लंबी पारी खेली और उप प्रधानमंत्री (1977) के पद तक पहुंचे। राजनैतिक नेतृत्‍व की क्षमता रखने वाले बाबू जगजीवन राम ने हमारे देश के राजनैतिक और संवैधानिक विकास तथा सामाजिक बदलाव में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई।

बाबू जगजीवन राम की विचारधारा, उनके जीवन दर्शन और मिशन तथा दलितों के लिए उनकी सेवाओं को आगे बढ़ाने के लिए उनकी समृति में नयी दिल्‍ली में ‘’बाबू जगजीवन राम राष्‍ट्रीय प्रति‍ष्‍ठान’’ की स्‍थापना की गई। सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत यह फाउंडेशन एक स्‍वायत्‍त्‍शासी संगठन के रूप में कार्य कर रहा है।

संविधान का अनुच्‍छेद 16 केन्‍द्र सरकार को यह अधिकार प्रदान करता है कि वह समाज के शोषित वर्ग के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए विशेष प्रावधान करे ताकि उन्‍हें भी समाज के अन्‍य वर्गों के बराबर सुविधाएं मिल सकें। शिक्षा किसी भी तरह के सामाजिक-आर्थिक विकास का आधार है। अनुसूचित जातियों के लिए शिक्षा का महत्‍व इसलिए और बढ़ जाता है कि इससे उनका सामाजिक दर्जा बढ़ता है और उनमें रोजगार और अन्‍य आर्थिक गतिविधियों में उभरते अवसरों का लाभ उठाने की सूझबूझ पैदा होती है।

जाति, धर्म, क्षेत्र और इस तरह की अन्‍य बाधाओं से हटकर देखा जाए तो देश में निरक्षरता एक आम समस्‍या है। अनुसूचित जाति के लोगों के जीवन और स्थिति पर इसका प्रभाव अलग से दिखाई देता है। अनुसूचित जाति के समूहों में महिलाओं को सामाजिक बंधनों, फिर महिला होने और इसके बाद कम पढ़े-लिखे होने जैसे संकटों को झेलना पड़ता है।

लड़कियों के लिए छात्रावास के निर्माण की योजना का उद्देश्‍य घरेलू कामकाज के बंधन से मुक्‍त माहौल में अध्‍ययन के लिए अनुकूल माहौल बनाना है ताकि लक्षित समूह के छात्र अपनी पढ़ाई बीच में छोड़े बिना कैरियर बना सकें। इस तरह के छात्रावास ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों के अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए काफी लाभदायक रहे हैं।

लड़कियों के लिए छात्रावास के निर्माण की योजना तीसरी पंचवर्षीय योजना से शुरू हुई जबकि लड़कों के लिए यह योजना वर्ष 1989-90 में शुरू की गई। अनुसूचित जाति के लड़कों और लड़कियों के लिए छात्रावास बनाने की पूर्व में केन्‍द्र द्वारा प्रायोजित योजना में 1 जनवरी, 2008 में संशोधन किया गया और इसे ‘’ बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना’’ नाम दिया गया। संशोधित योजना में जो मुख्‍य बदलाव किये गए उनमें लड़कियों के लिए छात्रावास बनाने के लिए (क) राज्‍यों/केन्‍द्र शासित और केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों को 100 फीसदी और डीम्‍ड विश्‍वविद्यालयों और निजी संस्‍थानों को 90 फीसदी सहायता देना शामिल है और (ख) छात्रावासों के निर्माण वर्तमान अवधि की 5 वर्ष से घटाकर 2 वर्ष कर दी गई है।

यह योजना माध्‍यमिक, उच्‍च्‍तर माध्‍यमिक स्‍कूलों, कॉलेजों और विश्‍वविद्यालयों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के लड़के-लड़कियों के लिए रहने की व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करने के उद्देश्‍य से शुरू की गई।

राज्‍य सरकारें/केन्‍द्र शासित प्रशासन और केन्‍द्र तथा राज्‍य के विश्‍वविद्यालय/संस्‍थान नये छात्रावास की इमारत के निर्माण, उनके नवीनीकरण, मरम्‍मत और विस्‍तार के लिए केन्‍द्रीय सहायता के पात्र हैं। जबकि गैर सरकारी संगठन और निजी क्षेत्र में डीम्‍ड विश्‍वविद्यालय अपने वर्तमान छात्रावासों के विस्‍तार के लिए ही यह सहायता ले सकते हैं।

लड़कियों के छात्रावासों के लिए सहायता का ढांचा इस प्रकार है:

* राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों/ विश्‍वविद्यालयों को नये छात्रावासों के निर्माण और मौजूदा छात्रावासों के विस्‍तार के लिए शत-प्रतिशत सहायता।

* लड़कियों के छात्रावासों के विस्‍तार के लिए गैर सरकारी संगठन और निजी क्षेत्र के डीम्‍ड विश्‍वविद्यालयों को 90 फीसदी केन्‍द्रीय सहायता

* लड़कों के छात्रावासों के लिए केन्‍द्रीय सहायता

* राज्‍यों को 50:50 अनुपात के आधार पर

* केन्‍द्र शासित प्रशासनों को 100 प्रतिशत

* केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालयों को 90:10 अनुपात के आधार पर

* राज्‍यों के विश्‍वविद्यालयों/संस्‍थानों को 45:10 अनुपात के आधार पर

* गैर सरकारी संगठन और निजी क्षेत्र में डीम्‍ड विश्‍वविद्यालयों को (केवल विस्‍तार के लिए) 45:45:10 अनुपात के आधार पर।

योजना के अंतर्गत स्‍वीकार्य केन्‍द्रीय सहायता के अलावा प्रत्‍येक छात्र के लिए चारपाई, मेज और कुर्सी का प्रावधान करने के लिए उसे एक बार 2500 रूपये की सहायता प्रदान की जाती है।

योजना की अन्‍य प्रमुख बातें इस प्रकार हैं :

छात्रावास की लागत को पूरा करने के लिए केन्‍द्रीय सहायता जारी की जाती है और इस तरह के छात्रावासों के रखरखाव का काम सम्‍बद्ध राज्‍य सरकारों/केन्‍द्र शासित प्रशासनों के पास है।

कार्यान्‍वयन एजेंसियों को सहायता अनुदान सीधे दी जाती है। गैर सरकारी संगठन/डीम्‍ड विश्‍वविद्यालयों को सहायता दो किश्‍तों में और राज्‍य सरकार/केन्‍द्र शासित प्रशासन और केन्‍द्र और राज्‍य के विश्‍वविद्यालयों/संस्‍थानों को एक किश्‍त में सहायता दी जाती है।

लड़कियों के मामले में छात्रावास उन इलाकों में होने चाहिए जहां अनुसूचित जाति की लड़कियों की साक्षरता दर कम है। लड़कियों के छात्रावास शैक्षणिक संस्‍थानों के आसपास (जहां तक संभव हो 200 मीटर के दायरे में) बनाए गए हैं।

एक छात्रावास में 100 से ज्‍यादा छात्र नहीं होने चाहिए। लेकिन जरूरत के मुताबिक इस संख्‍या में परिवर्तन के बारे में विचार किया जा सकता है।

सचिव (सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय) की अध्‍यक्षता में एक संचालन समिति ।

छात्रावासों के निर्माण की निगरानी और समीक्षा करती है। प्रभावकारी निगरानी के लिए मंत्रालय/संचालन समिति खुद एजेंसियों/प्राधिकारियों से परियोजनाओं का निरीक्षण कराती है।

बाबू ज जगजीवन राम छात्रावास योजना से निश्चित तौर पर समाज के दलित वर्ग के छात्रों के लिए बाबूजी के सपने को साकार करने में मदद मिलेगी।

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सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय से प्राप्‍त जानकारी पर आधारित

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